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ईको फ्रेंडली सोसाइटी दे रही पर्यावरण बचाने की सीख

ईको फ्रेंडली सोसाइटी दे रही पर्यावरण बचाने की सीख

ईको फ्रेंडली सोसाइटी दे रही पर्यावरण बचाने की सीख

पुणे की एक सोसाइटी है, जहां आपको ढ़ेर सारी विंडमिल (पवनचक्की) देखने को मिल जायेगी। इसकी बदौलत सोलर एनर्जी तैयार की जाती है। इसके अलावा भी इस सोसायटी में पर्यावरण सरंक्षण के लिये ढ़ेर सारे उपाय किये गये हैं, जिससे हर किसी को सीखने की ज़रूरत है।

सोलर एनर्जी से बिजली

पिंपरी चिंचवाड में पलाश कोऑपरेटिंग हाउसिंग सोसाइटी ईको फ्रेंडली सोसाइटी है, क्योंकि यहां पर्यावरण को बचाने के लिये कोई एक या दो नहीं, बल्कि ढ़ेर सारे उपाय किये गये हैं। सबसे पहले तो बिजली की बचत के लिये विंडमिल लगाये गये हैं, जिनकी मदद से सोलर एनर्जी बनती है। पलाश कोऑपरेटिंग हाउसिंग सोसाइटी में आठ बिल्डिंग हैं, जिसमें कुल 295 फ्लैट्स हैं। यहां विंडमिल लगाने की शुरुआत 2007 से हुई थी।

बचत से निकलता है खर्च

पहले सिर्फ दो बिल्डिंग ही विंडमिल लगाई गई थी। 2008 में तीन इमारतों पर छह विंडमिल लगाई गई और अब तो इस सोसायटी में 12 विंडमिल लग चुकी हैं। इन्हें लगाने में 12 लाख रुपये तक का खर्च हुये हैं। ये विंडमिल डीसी (डायरेक्ट करंट) प्रड्यूस करती हैं, जिन्हें बैटरी में स्टोर करने के बाद इन्वर्टर की मदद से एसी (अल्टरनेट करंट) में बदल दिया जाता है। इस सप्लाई से कॉरिडोर और अन्य जगहों पर लाइट जलती है। यहां पर औसतन 40 से 48 यूनिट बिजली का उत्पादन हो जाता है।

ईको फ्रेंडली सोसाइटी दे रही पर्यावरण बचाने की सीख
विंडमिल से तैयार हो रही है बिजली  | इमेज: फाइल इमेज

बैटरी को हर पांच साल में बदलना पड़ेगा, जिस पर करीब 14 से 15 लाख रुपये तक खर्च आयेगा। सोसायटी इस खर्च की भरपाई बिजली बिल में मिली छूट से करेगी। दरअसल, सोसाइटी का बिजली बिल हर महीने दो लाख रुपये तक का था। हालांकि विंडमिल की बदौलत तैयार बिजली एमएसईडीसीएल (MSEDCL) को सप्लाई की जाती है, जिससे सोसायटी को एक से 1.2 लाख रुपये की छूट मिल जाती है। यानी इससे हर महीने 80 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक की बचत हो जाती है। इतना ही नहीं बिजली की बचत के लिये सोसायटी में एलईडी लाइट्स का लगाई गई हैं।

अन्य उपाय

बिजली के साथ ही पानी की बचत के लिये पलाश हाउसिंग सोसाइटी में रेन वाटर हार्वेस्टिंग की भी व्यवस्था है। चूंकि नगरपालिका से मिले पानी से सोसायटी की ज़रूरत पूरी नहीं हो पाती, इसलिये यहां चार बोरवेल बनाये गये हैं। यहां का वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम भी कमाल का है। सूखे और गीले कचरे को अलग रखा जाता है और गीले कचरे से हर साल करीब पांच-छह टन खाद तैयार की जाती है। इसके अलावा यहां हरियाली भी खूब है। सोसायटी में अब तक करीब 1600 पेड़ लगाये जा चुके हैं। इसके अलावा सोसायटी कंपाउंड में 1000 स्क्वायर फीट की जगह दी गई है ताकि बच्चे वहां ऑर्गेनिक सब्ज़ियां उगा सके।

पलाश सोसायटी का पर्यावरण बचाने के बैलेंस्ड तरीका वाकई कमाल का है। इससे हर किसी को सबक लेने की ज़रूरत है।

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