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पुलिस और टीचर की ज़िम्मेदारी एक साथ

पुलिस और टीचर की ज़िम्मेदारी एक साथ

पुलिस और टीचर की ज़िम्मेदारी एक साथ

बेहतर भविष्य के लिये बच्चों का शिक्षित होना बहुत ज़रूरी है, लेकिन हमारे समाज में ऐसे बहुत से बच्चे हैं, जो गरीबी की वजह से पढ़ाई नहीं कर पाते। ऐसे बच्चों को बस गुड्डन चौधरी जैसे निस्वार्थ लोगों का सहारा होता है, जो शिक्षा देकर उनके भविष्य को संवारने की कोशिश कर रही हैं।

मुफ्त पढ़ाई

आप में से बहुत से लोग ऐसे होंगे, जो शिक्षित और दूसरों की मदद करने में सक्षम होंगे, लेकिन क्या आपने कभी गरीब बच्चों की मदद के लिये कोई कदम उठाया है? क्या कोई ऐसा काम किया है, जिससे वंचितों को फायदा हो सके जैसा कि बुलंदशहर की गुड्डन चौधरी कर रही हैं। गुड्डन चौधरी पेशे से पुलिस कांस्टेबल हैं, मगर वह बच्चों को पढ़ाने का भी काम कर रही हैं, यानी एक साथ वह दो पेशों से जुड़ी हैं। पुलिस की नौकरी से उनकी रोज़ी-रोटी चलती है और बच्चों को पढ़ाने का काम वह अपनी आत्मसंतुष्टि के लिये करती है।

हर काम में हमारा फायदा हो, यह ज़रूरी नहीं। हमें कुछ ऐसा भी करना चाहिये, जिससे दूसरों का फायदा हो जैसा कि गुड्डन कर रही हैं। ऑफिस से आने के बाद अपने खाली समय में वह गरीब बच्चों को पढ़ाती हैं क्योंकि उनका मानना है कि शिक्षा से ही बच्चों का भविष्य संवारा जा सकता है। इतना ही नहीं, वह अपनी सैलरी का 30 फीसदी हिस्सा बच्चों की किताब-कॉपी आदि पर खर्च करती हैं।

पुलिस और टीचर की ज़िम्मेदारी एक साथ
बच्चों का भविष्य सुधार रही हैं पुलिस वाली  | इमेज : फाइल इमेज

मिलती है खुशी और संतुष्टि

गुड्डन के स्कूल में बेहद गरीब परिवार से 24 बच्चे पढ़ने आते हैं, इसलिए गुड्डन उन्हें किताब-कॉपी आदि भी देती हैं। बच्चे जब उन्हें ‘पुलिस मैडम’ कहकर बुलाते हैं, तो गुड्डन के चेहरे पर मुस्कान बिखर जाती है। अपनी सुख-सुविधाओं और जीवन को बेहतर बनाने के लिये तो हर कोई काम करता है, लेकिन कभी थोड़ा समय और संसाधन दूसरों की ज़िंदगी संवारने में लगाकर देखिये, दिल को बहुत सुकून मिलेगा। आपकी मदद से जिनका फायदा होगा, उन वंचितों की दुआएं यकीनन आपके चेहरे पर मुस्कान ले आयेंगी और आपको सच्चे सुख की अनुभूति होगी।

दूसरों के लिए जीना

आप भी अपने आसपास के वंचित लोगों की मदद कर सकते हैं जैसे-

– किसी वॉचमैन, सफाई वाले के बच्चे को कुछ घंटे फ्री में पढ़ाना।

– गरीब बच्चों को किताब-कॉपी बांटना।

– गरीब बच्चों को पढ़ाने वाली संस्था को दान करना।

– अपने बच्चों की पुरानी किताबें रद्दी वाले को देने की बजाय किसी गरीब बच्चे को देना।

इमेज : यूपी पुलिस न्यूज़ 

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