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मुफ्त मेडिकल कोचिंग संवार रही गरीब बच्चों का भविष्य

मुफ्त मेडिकल कोचिंग संवार रही गरीब बच्चों का भविष्य

आपकी ड्रीम जॉब है बस एक कदम दूरमुफ्त मेडिकल कोचिंग संवार रही गरीब बच्चों का भविष्य

मेडिकल और इंजीनियरिंग के टेस्ट को पास करने के लिये बच्चे कोचिंग का सहारा लेते है लेकिन गरीब पैरेंट्स अपने बच्चों को ऐसी कोचिंग नहीं दिलवा पाते। मगर बिहार के आनंद कुमार जैसे लोग गरीब बच्चों को इंजीनियरिंग की कोचिंग मुफ्त देकर समाज में मिसाल कायम करते है। इसी तरह से राजस्थान के एक डॉक्टर की बदलौत गरीब बच्चों का डॉक्टर बनने का सपना पूरा हो रहा है। यहां बच्चों को मुफ्त में मेडिकल कोचिंग दी जा रही है।

‘50 विलेजर्स’

इसी नाम से डॉक्टर भरत सरन बाड़मेर जिले में पिछले 7 सालों से मेडिकल कोचिंग सेंटर चला रहे हैं, जहां डॉक्टर बनने के इच्छुक छात्रों को मुफ्त में पढ़ाया जा रहा है। यहां ऐसे इंटैलिजेंट बच्चों को पढ़ाया जाता है, जिनके माता-पिता के पास उन्हें पढ़ाने के लिए पैसे नहीं है। इस कोचिंग सेंटर में हर साल 50 बच्चों को तैयार किया जाता है, जिसमें 11वीं और 12वीं के 25-25 स्टुडेंट शामिल होते है। इस साल इस कोचिंग में पढ़ने वाले 25 में से 15 छात्रों ने ऑल इंडिया मेडिकल एंट्रेस एग्‍जाम ‘नीट’ पास कर लिया है। ’50 विलेजर्स’ नाम के इस कोचिंग संस्‍थान से कई आईपीएस और आईएएस अफसर जुड़े है,  ये बच्‍चों की पढ़ाई का खर्च उठाते हैं।

सफलता का रिकॉर्ड

मुफ्त मेडिकल कोचिंग संवार रही गरीब बच्चों का भविष्य
पूरा हो रहा गरीब बच्चों के डॉक्टर बनने का सपना | इमेज : एएनआई ट्विटर

इस कोचिंग इंस्टीट्यूट की सफलता का प्रतिशत सौ फीसदी है। अब तक यहां से 100 स्‍टूडेंट कामयाब हो चुके हैं। इस कोचिंग सेंटर के 30 छात्र एमबीबीएस की परीक्षा पास कर चुके हैं, 5 एम्स में जा रहे हैं, कुछ वेटेनरी, तो कुछ आयुर्वेदिक फील्ड में गये हैं।

सेल्फ स्टडी

यहां छात्रों को सेल्फ स्टडी के लिए प्रेरित किया जाता है, क्योंकि डॉ. सरन का मानना है किसी भी एग्ज़ाम में सफल होने के लिये यह बहुत ज़रूरी है। छात्र यहां 11 से 12 घंटे पढ़ाई करते हैं। उन्हें किताबों और अन्य स्टडी मैटीरियल के साथ खाना भी मुफ्त दिया जाता है। दूरदराज के गांवों को मुफ्त शिक्षा देने का मकसद है कि डॉक्टर बनने के बाद वह अपने गांव व समुदाय की सेवा कर सकें।

ऐसे चुने जाते हैं बच्चे

इस कोचिंग सेंटर में चुने जाने के लिये छात्रों को दसवीं में 75 फीसदी मार्क्स होने चाहिए। उनमें डॉक्टर बनने की चाह होनी चाहिये। जो बच्चे डॉक्टर बनने की चाहत रखते हैं, उन्हें एक एंट्रेस एग्ज़ाम देना पड़ता है। बच्‍चों को चुनने के आखिरी चरण में संभावित छात्रों के घर जाकर उनकी आर्थिक हालत देखी जाती है और उसके आधार पर ही उन्हें बाड़मेर के ’50 विलेजर्स’ कोचिंग सेंटर में एडमिशन मिलता है।

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