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मेडिटेशन से बदल रहा है कैदियों का जीवन

मेडिटेशन से बदल रहा है कैदियों का जीवन

मेडिटेशन से बदल रहा है कैदियों का जीवन

योग और ध्यान न सिर्फ शरीर और मन को स्वस्थ रखता है, बल्कि जीवन के प्रति पॉज़िटिव दृष्टिकोण भी विकसित करता है। इसलिये बिहार में कैदियों को बेहतर इंसान बनाने और ज़िंदगी के प्रति पॉज़िटिव सोच रखने के लिये उन्हें योग और प्राणायाम सिखाया जा रहा हैं।

एनजीओ की पहल

योग और प्राणायम से जीवन को बेहतर बनाने वाली एक एनजीओ अब बिहार में कैदियों का जीवन सुधार रही है। ‘प्रिज़न स्मार्ट प्रोग्राम’ के तहत यह संस्था राज्य की अलग-अलग जेलों में जाकर आठ दिन के कैंप का आयोजन करती हैं, जहां प्रोफेशनल्स कैदियों को ध्यान और प्राणायम की ट्रेनिंग देते हैं। यह प्रोग्राम फरवरी से ही शुरू हुआ था। कैदियों को सुदर्शन क्रिया, भातृका प्राणायाम, ध्यान आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है। कैदी इसमें बहुत सक्रियता से भाग भी ले रहे हैं। साथ ही ऐसे कार्यक्रम और आयोजित करने की मांग दिखाती है, वह खुद अपनी ज़िंदगी में सुधार करना चाहते हैं। इस कार्यक्रम का मकसद कैदियों को आत्मनिरिक्षण के लिये प्रोत्साहित करना और उन्हें खुश रखना है।

मेडिटेशन से बदल रहा कैदियों की जीवन
बेहतर ज़िंदगी के लिए मेडिटेशन  | इमेज : फाइल इमेज

जेल अधिकारियों के लिये भी कार्यक्रम

अब तक है बिहार की कई जेलों में ‘प्रिज़न स्मार्ट प्रोग्राम’ का सफल आयोजन किया जा चुका है और इसे लेकर कैदियों का उत्साह बताता है कि वह खुद भी अपने जीवन को बेहतर बनाना चाहते हैं। कैदियों के साथ ही जेल अधिकारियों को भी योग और प्राणायाम की ट्रेनिंग दी जा रही है। संस्था का कहना है कि इस प्रोग्राम का उद्देश्य कैदियों के जीवन को बेहतर बनाना है। आखिरकार वह भी इंसान है और उन्हें भी अच्छी देखभाल की ज़रूरत है।

ध्यान व प्राणायम के फायदे

आज की तनावपूर्ण जीवनशैली में हर किसी को स्वस्थ रहने के लिए योग और ध्यान को अपने रोज़ाना के रूटीन में शामिल करना चाहिये।

– इससे तनाव तो दूर होता ही है, मानसिक शांति भी मिलती है।

– शांत मन होने पर इंसान पॉज़िटिव सोचता है और जब आपकी सोच पॉज़िटिव होती है, तो बहुत सी परेशानियां अपने आप दूर हो जाती है।

– योग करने से शरीर फिट रहता है और बीमारियां भी कोसों दूर रहती है।

तो आप यदि फिज़िकली और मेंटली फिट रहना चाहते हैं, तो मेडिटेशन और योग को अपने रूटीन में ज़रूर शामिल करें।

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